- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- SC टिप्पणी से इंदौर को...
SC टिप्पणी से इंदौर को राहत, रेबीज़ और आक्रामक आवारा कुत्तों पर कार्रवाई के संकेत

Madhya Pradesh मध्य प्रदेश : सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों के बाद इंदौर शहर को आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के मामले में बड़ी राहत मिली है। अदालत ने रेबीज़ से संक्रमित और “आक्रामक” आवारा कुत्तों को इच्छामृत्यु देने की अनुमति से जुड़े संकेत दिए हैं, जिसके बाद इंदौर में लंबे समय से चल रही इस समस्या पर नई बहस शुरू हो गई है। शहर पहले से ही आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और उनके काटने की घटनाओं में वृद्धि से जूझ रहा है।
हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस दिशा में तत्काल कार्रवाई संभव नहीं है क्योंकि अभी तक कोई स्पष्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि SOP के अभाव में न केवल प्रक्रिया में असमंजस पैदा होगा, बल्कि कानूनी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती “खतरनाक और आक्रामक कुत्ते” की परिभाषा को लेकर है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किन मानकों के आधार पर किसी कुत्ते को इस श्रेणी में रखा जाएगा। इसी अस्पष्टता के कारण किसी भी कार्रवाई को लागू करते समय भ्रम की स्थिति बन सकती है।
इंदौर नगर निगम (IMC) ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्वागत किया है और इसे गंभीरता से लागू करने का भरोसा दिया है। अधिकारियों ने कहा है कि अदालत के निर्देशों के अनुरूप शहर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन की प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से ही लागू किया जाएगा।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का “पूरी निष्ठा और भावना के साथ” पालन करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई शुरू करने से पहले एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा, जिसमें प्रशिक्षित कर्मचारी शामिल होंगे।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं, ताकि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी जटिलता से बचा जा सके। नगर निगम का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि कार्रवाई मानवीय और कानूनी ढांचे के भीतर ही हो।
फिलहाल शहर में आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए स्पष्ट नीति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण जरूरी है।
कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद इंदौर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर नई दिशा जरूर मिली है, लेकिन SOP और स्पष्ट दिशानिर्देशों के बिना इसे लागू करना अभी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।





